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Blogs about: घर

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कुछ तो हो जो ख़ास हो ...

Gayatri wrote 2 months ago: कुछ तो हो जो ख़ास हो मुझमे भी कोई बात हो दिलो को जो लुभा सके ऐसा कोई अंदाज़ हो यही चाहता है हर कोई की … more →

Tags: कविता, आशाए, पोएम, सपने, हिंदी

मैं अपने मन की राह चुनूंगीं3 comments

Nidhi KM wrote 2 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, इंतज़ार, कभी, काली रात, खुशबू, जीवन, तुम्हारे, नयी सुबह

बजट का कटु सत्य-हास्य व्यंग्य (hindi vyangya on budget)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: उन्होंने जैसे ही दोपहर में बजट देखने के लिये टीवी खोला वैसे ही पत्नी बोली-‘सुनते हो जी! कल तुमने दो … more →

Tags: writing, हिन्दी, inglish, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, yakeen, हास्य व्यंग्य, आलेख, हिंदी साहित्य

सहर-ब-सहर मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ9 comments

विनय wrote 7 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, असरकार, चारागर, ठिकाना, तन्हाई, दर्द, दामन, दुआ, दोस्त

"घर में वापसी" - धूमिल की एक कविता 4 comments

Satish Chandra satyarthi wrote 7 months ago: सुदामा प्रसाद पाण्डेय “धूमिल” की एक और कविता आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। पता नहीं क्यो … more →

Tags: सुदामा पांडेय 'धूमिल', गरीब, धूमिल, पत्नी, पिता, बेटी, माँ, रिश्ते, सुदामा प्रसाद पाण्ड

बहुत पुराना है वह रिश्ता5 comments

विनय wrote 1 year ago: बहुत पुराना है वह रिश्ता जिसे गठरी में बाँधकर रखा है मेहमान को बिठाया बाहर घर को किराये पर दे रखा है … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, रिश्ता, Home, relation, मेहमान, Guest

नफरत की आग 6 comments

kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, नफरत, बाज़ार

बहुत दिनों बाद 3 comments

kmuskan wrote 1 year ago: आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने बैठी हूँ ।घर में तोड़ फोड़ ,साफ सफाई का काम हो रहा था ,इस कारण कंप्यूटर क … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, बचपन, मजा

उम्मीद है हम तुम मिलेंगे3 comments

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे … more →

Tags: मेरा गीत, उम्मीद, धूप, इश्क़, Heart, Love, light, Mind, दिल

तुम नहीं तो रंग नहीं होली में4 comments

विनय wrote 1 year ago: तुम नहीं तो रंग नहीं होली में नहीं सजता आलेखन रंगोली में है दर्द में आज भी वही मज़ा न है लुत्फ़ ग़ैर क … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, रंग, दर्द, डोली, Pain, Fun, Stranger, Dreams

अश्को-अक्स चश्म में नहीं है

विनय wrote 1 year ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ जितना सुरूर उन आँखों में था उतना और कहाँ रोज़ शाम दरवाज़े पे बैठ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, eyes, haze, प्यार, दरवाज़ा, मोहब्बत, शाम

क्यों हो गया न प्यार...!

विनय wrote 1 year ago: यह प्यार चीज़ क्या है? दीवानों का है काम बेकार ही पीछे दौड़ते हैं बिन सोचे अन्जाम कहते थे कि प्यार हम … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, NEED, Heart, Love, दिल, प्यार, एतबार, मोहब्बत

कभी तुम घर आओ ना

विनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Heart, Love, light, Flower, मौसम, दिल, प्यार

घर हवाओं में बना टिकता है क्या

Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वो शहर...

Gaizabonts wrote 1 year ago: वो शहर की भीड़ में अपना रास्ता ढूंढना वो ठेले पर सस्ते में जल्दी से नाश्ता करना वो वक्त को बचाने के … more →

Tags: भाव, लमहें, विचार, शहर, हिंदी

रक़ाबी चाँद जला दो

विनय wrote 1 year ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाये कभी तो पास बुला लो तेरी नज़दीकियों का मुझे एहसास हो जाये गुला … more →

Tags: मेरी नज़्म, चाँद, इश्क़, Heart, Love, Reminisce, आइना, दिल, प्यार

वह कहाँ चले गये

विनय wrote 1 year ago: वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे थोड़ा-सा और क़रीब हमारे वह कहाँ चले गये जो कल घर आये थे हमारे ब … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, क़रीब, दिल, प्यार, मोहब्बत, तस्वीर, नज़ारें

'विनय' इक आईना है टूटा हुआ

विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →

Tags: मेरी नज़्म, दर्द, क़रीब, Frozen, मौसम, Pain, आग, विनय, आँसू


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