दान मांगत ही में आनि कछु कीयो। धाय लई मटुकिया आय कर सीसतें रसिकवर नंदसुत रंच दधि पीयो॥१॥ छूटि गयो झगरो हँसे मंद मुसिक्यानि में तबही कर कमलसों परसि मेरो हियो। चतुर्भुजदास नयननसो नयना मिले तबही गिरिराज… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: दान मांगत ही में आनि कछु कीयो। धाय लई मटुकिया आय कर सीसतें रसिकवर नंदसुत रंच दधि पीयो॥१॥ छूटि गयो झ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: रावल के कहे गोप आज व्रजधुनि ओप कान देदे सुनों बाजे गोकुल मंदिलरा। जसोदा के पुत्र भयो वृषभानजूसो कह्य … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल तुम बिन रह्यो न जाय हो॥ बृजराज लडेतोलाडिले॥ बंक चिते मुसकाय के लाल सुंद … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री गोवर्धनवासी सांवरे लाल तुम बिन रह्यो न जाये । हों ब्रजराज लडे तें लाडिले ॥ बंकचिते मुसकाय के ला … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: बैठे लाल फूलन की चौखंडी । चंपक बकुल गुलाब निवारो रायवेलि श्री खंडी ॥१॥ जाई जुई केवरो कुंजो कनक कणेर … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: फूलन की मंडली मनोहर बैठे जहाँ रसिक पिय प्यारी । फूलन के बागे और भूषण फूलन की पाग संवारी ॥१॥ ढिंग फूल … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मनमोहन अद्भुत डोल बनी । तुम झूलो हों हरख झुलाऊं वृंदावन चंदधनी ॥१॥ परम विचित्र रच्यो विश्वकर्मा हीरा … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे । जहाँ निसवासर रास में रसिकवर, कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥ थकित … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे । एहि रसनातें भजो नामरस अमृत भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥ भानु तनया … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: प्राणपति विहरत श्री यमुना कूले । लुब्ध मकरंद के भ्रमर ज्यों बस भये, देखि रवि उदय मानो कमल फूले ॥१॥ क … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो । भक्त के वश कृपा करत हें सर्वदा ऐसो श्री यमुना जी को हे जु सा … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: महामहोत्सव श्री गोकुल गाम । प्रेम मुदित युवती जस गावत श्याम सुन्दर को ले ले नाम ॥ जहाँ तहाँ लीला अवग … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: मैया मोहि माख्नन मिसरी भावे । मीठो दधि मिठाई मधुघृत, अपने कर सों क्यों न खवावे ॥१॥ कनक दोहनी दे कर म … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: मंगल आरती गोपाल की । नित प्रति मंगल होत निरख मुख, चितवन नयन विशाल की ॥ मंगल रूप श्याम सुंदर को, मंगल … more →