विनय wrote 1 year ago: मैं अत्यन्त अकेला था अनन्त शून्य था मेरे अन्दर यूँ ही विचार आया मन में अपना भी हो एक सुन्दर घर कुछ न … more →
विनय wrote 1 year ago: जब-जब चाँद को छूना चाहा है मैंने बादलों के साये उसको दूर ले गये मैं अब कि ऐसा मौसम बनाऊँगा बादलों के … more →