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Blogs about: चराग़े दिल संग्रह

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बहारों का आया है मौसम सुहाना1 comment

Devi Nangrani wrote 1 month ago: गजलः 41 बहारों का आया है मौसम सुहाना नये साज़ पर कोई छेड़ो तराना. ये कलियां, ये गुंचे ये रंग और खुशब … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

यूं उसकी बेवफाई का मुझको गिला न था

Devi Nangrani wrote 12 months ago: ग़ज़लः३९ यूं उसकी बेवफाई का मुझको गिला न था इक मैं ही तो नहीं जिसे सब कुछ मिला न था. लिपटे हुए थे झू … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

बहारों का आया है मौसम

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ४१ बहारों का आया है मौसम सुहाना नये साज़ पर कोई छेड़ो तराना. ये कलियां, ये गुंचे ये रंग और खु … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

रिश्ता तो सब ही जताते है4 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ४० रिश्ता तो सब ही जताते है पर कुछ ही खूब निभाते है.   दुख दर्द हैं ऐसे महमां जो आहट के बिन आ … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

कितने आफ़ात से लड़ी हूँ मैं10 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३८ कितने आफ़ात से लड़ी हूँ मैं तब तेरे दर पे आ खड़ी हूं मैं. वो किसी से वफ़ा नहीं करता कहता ह … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

तर्क कर के दोस्ती फिरता है क्यों?4 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३७ तर्क कर के दोस्ती फिरता है क्यों बनके आखिर अजनबी फिरता है क्यों? चल वहां होगी जहां शामे-गज … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

कोई षडयंत्र रच रहा है क्या 5 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः३६ कोई षडयंत्र रच रहा है क्या जन्मदाता बना हुआ है क्या? राहगीरों को मिलके राहों पर राह को घर स … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

यही रौशनी है, यही रौशनी है.1 comment

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३५ बुझे दीप को जो जलाती रही है यही रौशनी है, यही रौशनी है. जो बेलौस अपने ख़ज़ाने लुटा दे यही … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

बहता रहा जो दर्द का सैलाब3 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३४ बहता रहा जो दर्द का सैलाब था न कम आंखें भी रो रही हैं, ये अशआर भी है नम. जिस शाख पर खड़ा थ … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

बताऊँ तुम्हें क्या है दिल का लगाना6 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३३ ख़ता अब बनी है सजा का फ़साना बताऊँ तुम्हें क्या है दिल का लगाना. हवा में न जाने ये कैसा नश … more →

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करम ख़ुदा का है सब पर7 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३२ ये सायबां है जहां, मुझको सर छुपाने दो करम ख़ुदा का है सब पर, वो आज़माने दो. जो दिल के तार … more →

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अंधेरी गली में मेरा घर रहा है5 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: गज़लः ३१ अंधेरी गली में मेरा घर रहा है जहां तेल-बाती बिना इक दिया है. जो रौशन मेरी आरजू का दिया है म … more →

Tags: ग़ज़ल-देवी नागरानी

रूठा वो बे सबब न था मुझसे4 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः ३० जाने क्या कुछ हुई ख़ता मुझसे रूठा वो बे सबब न था मुझसे. जिसको हासिल न कुछ हुआ मुझसे मौन का … more →

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ठहराव जिंदगी में दुबारा नहीं मिला5 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: गज़लः २९ ठहराव जिंदगी में दुबारा नहीं मिला जिसकी तलाश थी वो किनारा नहीं मिला. वर्ना उतारते न समंदर म … more →

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याद मुझे है अब तक6 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: गजलः २८ वो अदा प्यार भरी याद मुझे है अब तक बात बरसों की मगर कल की लगे है अब तक. हम चमन में ही बसे थे … more →

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चोट ताज़ा कभी जो खाते हैं 11 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: ग़ज़लः २७ चोट ताज़ा कभी जो खाते हैं ज़ख्मे-‍‌दिल और मुस्कराते हैं. मयकशी से ग़रज़ नहीं हमको तेरी आँख … more →

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ग़म का पैग़ाम बादे-सबा दे गई2 comments

Devi Nangrani wrote 1 year ago: गज़लः २६ हमने चाहा था क्या और क्या दे गई ग़म का पैग़ाम बादे-सबा दे गई. ुस्कराहट को होटों से दाबे रक् … more →

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उदासी में डूब जाता है3 comments

Devi Nangrani wrote 2 years ago: गज़लः२५ ख़्यालों ख़्वाब में ही महफिलें सजाता है. और उसके बाद उदासी में डूब जाता है.   वो चाहता … more →

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हम दिलों में निवास करते हैं4 comments

Devi Nangrani wrote 2 years ago: ग़ज़लः २४ दिल को हम कब उदास करते हैं आज भी उनकी आस करते हैं. हमको ढूँढो नही मकानों में हम दिलों में … more →

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