अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम एक नया सिलसिला तुम जान मेरी अजंता जिस पर यह दिल मचला वह तुम हो मेरी चंद्रकला फ़िज़ाओं में जादू घुला ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: कल की रात बहुत हसीन थी आँखों में उतर आये थे महके हुए ख़्वाब… पहले तो हम चराग़ों के नूर में बैठे … more →