Blogs about: चरित्र

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ब्लाग के पाठों पर ही अपनी पहचान लिखनी होगी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज मैं एक ब्लाग लेखक का ब्लाग पड़ रहा था जिसमें ब्लाग चोरों के साथ कुछ सहानुभुति दिखाने का आग्रह था। … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हिन्दी

पसीना ही कविता लिखवाता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है जैसे उसके साथ बंधे हों हाथ ग्रीष्म के जलती दोपहर में व्यग्रत … more →

Tags: inglish, कविता, शेर-ओ-शायरी, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, media, Internet

सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हुए बोला ‘‘दीपक बापू, तुम ही एक दोस्त हो जिससे हम कुछ कह पाते हैं … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, कविता, व्यंग्य चिंतन, शायरी, भारत, हास्य व्यंग्य

सच के परे बहस बेकार-कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: औरत पर अनाचार का प्रश्न उठता है कई बार अभी तक अनुत्तरित है एक प्रश्न कौन करता है उस पर वार दुनियां म … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, inglish, व्यंग्य, India, bharat, yakeen

समाज के टुकडों को जोड़ता दिखाते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज को टुकडों-टुकडों में बांटकर उसे अब दिखाने के लिए सजाते हर टुकड़े पर लगते मिटटी का लेप और रंग-बिर … more →

Tags: inglish, हिन्दी, sher-o-shayree, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Bloging, Education, Blogging

ज्योतिष और संयुक्त खाता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पति पत्नी का बैंक में संयुक्त खाता था. पत्नी को रोज सुबह टीवी पर आने वाले ज्योतिष कार्यक्रम में बहुत … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, संवेदना

ऐसा कोई सयाना नहीं रहा 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कोई हमारे दर्द को आकर सहलाये इस चाह में इन्तजार करने का ज़माना अब नहीं रहा किसी के दर्द को सहलाकर हम … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, अनुगूँज, कविता, यकीन, Shayri, Sher, साहित्य

शक्तिशाली लोग हर जगह समाज की फिक्र करें 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मलेशिया में भारतवंशियों के आन्दोलन पर वहाँ की सरकार का बराबर रवैया अत्यंत चिंता का विषय है और हर समय … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिन्दी, Dashboard, Kavita, Thought, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति

सच को बैसाखियों की जरूरत नहीं-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच बयान नहीं करती जिसे लिखना आता है वह कुछ भी लिख सकता है लिखने प … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, Dashboard, संपादकीय, बिंब-प्रतिबिंब, प्रतिबिंब, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

हास्य कविता -हिट- फ्लॉप के चक्कर में मत पडो2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह प्रतिदिन हिट होने के नुस्खे सबको बताएं और शब्दों के डाक्टर कहलाये मरीज पढ़ते नुस्खा जब तक डाक्टर स … more →

Tags: इंडिया, कविता, चिन्तन, दीपक भारतदीप, नज़रिया, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, भारत, व्यंग्य

क्या प्रेम और युद्ध में सब जायज है-chintan

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रेम और युद्ध में सब जायज है। क्या इस तर्क को सही मान लिया जाये? पूरी तरह यथार्थ मीवन जीने वाले लोग … more →

Tags: Blogroll, hindi, अभिव्यक्ति, bharat, ताल-बेताल, अनुभूति, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य


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