Blogs about: चरित्र
उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता
दीपक भारतदीप wrote 12 hours ago: अपने दिल का बयां कभी कभी दूसरे के अल्फ … more »
पसीना ही कविता लिखवाता है
दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है … more »
सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हु … more »
यह नहीं बता सकते कि हिट होगा कि फ्लाप-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: फंदेबाज के घर के दौरे पर पहूंचे तो उसक … more »
सच के परे बहस बेकार-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: औरत पर अनाचार का प्रश्न उठता है कई बार … more »
शब्द ही हमारे मित्र और गुरु-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कलम और दवात लेकर जब निकले थे घर से तो नह … more »
समाज के टुकडों को जोड़ता दिखाते
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: समाज को टुकडों-टुकडों में बांटकर उसे अ … more »
ज्योतिष और संयुक्त खाता
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: पति पत्नी का बैंक में संयुक्त खाता था. … more »
चाणक्य नीति:बिना पढी पुस्तक और कमाया धन किसी दूसरे को न दें
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: 1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष … more »
दौलत और शौहरत का नशा सिर चढ़कर बोले
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर … more »
संत कबीर वाणी:मांस खाने वालों की मुक्ति नहीं
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दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: तिल भर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान कासी क … more »
संत कबीर वाणी:अपनी चित्त वृत्ति को घोड़ी बनाएं
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: घायल की गति और है, औरन की गति और प्रेम ब … more »
सुनो सबकी करो मन की
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जिनके पास नही कोई ज्ञान वही पा रहे ज्ञ … more »
ऐसा कोई सयाना नहीं रहा
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कोई हमारे दर्द को आकर सहलाये इस चाह मे … more »
शक्तिशाली लोग हर जगह समाज की फिक्र करें
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: मलेशिया में भारतवंशियों के आन्दोलन प … more »
ऐसे लोग कहाँ से लायेंगे
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: गुरूजी ने चेले से कहा ‘लोग रामजी का न … more »
राम मिथक हैं तो यहाँ सत्य कौन है
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: राम अगर मिथक हैं तो यहाँ सत्य कौन है? शा … more »
दिल और दोस्ती
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हमें पूछा था अपने दिल को बहलाने के लिए … more »
सच को बैसाखियों की जरूरत नहीं-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच … more »
