कुम्हार के कुम्हारी- सम्पूर्ण (छत्तीसगढ़ी रचना) अहो भाग छत्तीसगढ़, तंय बाढ़ गे अड़बड़। बिसरागे माटी के भंड़वा, ये दे करे गड़बड़।।1।। हंड़िया मं चांउर तंउरय, भात पसावय कुंड़ेरा। परई मन लाज ढांकय, चिमनी… more →
Tularamdewangan's Blogtularamdewangan wrote 9 months ago: कुम्हार के कुम्हारी- सम्पूर्ण (छत्तीसगढ़ी रचना) अहो भाग छत्तीसगढ़, तंय बाढ़ गे अड़बड़। बिसरागे माटी … more →