सूरज उगाया जाता फूलों में यदि – शमशेर बहादुर सिंह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते ह… more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: सूरज उगाया जाता फूलों में यदि – शमशेर बहादुर सिंह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: पक चुकी आँखों की ताबिश (a poem by ravi kumar, rawatbhata) ००००० जब कलम से रिसता लहू जमने लगा हो सफ़हा … more →
prithvi wrote 7 months ago: ये कैसा मौसम है दोस्तो! …. चांद पूरा है. पूरा का पूरा. चमकता हुआ. तड़के पौने पांच बजे छत पर ज … more →
sareetha wrote 10 months ago: दुनिया में आज तक सच्ची प्रेम कहानियों का दारुण अंत देखा गया है । लेकिन हाल ही में नये दौर के हीर -र … more →
Praful wrote 11 months ago: चांद पर कुछ ऐसे खनिजों का पता चला है, जिनमें लोहा मिलता है। यह जानकारी चांद पर भेजे गए भारत के पहले … more →
Praful wrote 11 months ago: चांद पर कुछ ऐसे खनिजों का पता चला है, जिनमें लोहा मिलता है। यह जानकारी चांद पर भेजे गए भारत के पहले … more →