Blogs about: चाणक्य नीति

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चाणक्य नीतिः अपने घर के अन्दर की बात बाहर न कहें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, संस्कार, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bharatdeep

चाणक्य नीतिः 'जस के साथ तस' नीति में दोष नहीं

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति … more →

Tags: arthshastra, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, आलेख, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll, Chanakya

चाणक्य नीति:क्रोध है यमराज के समान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गोद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी की तरह ह … more →

Tags: aadhyatm, Adhyaatm, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, धर्म, विचार, सन्देश

चाणक्य नीति:कार्य सिद्धि बगुले से सीखें 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.चलती हुई बैलगाडी से पांच हाथ, घोडे से दस हाथ और हाथी से सौ हाथ दूर रहें. 2. यदि आप सफलता हासिल करन … more →

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चाणक्य नीति:अपनों का अपमान अधिक दुख:दायी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है जो क्रुद्ध होने पर सारे भेद देता है। ऐसा व्यक्ति कदापि म … more →

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चाणक्य नीति:अपनी हानि किसी को नहीं बतानी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के … more →

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चाणक्य नीति:मन का लगाव न हो तो आत्मीयता नहीं बन पाती

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके प्रति लगाव(सच्चा प्यार) वह दूर होते हुए भी पास रहता है। इसके विपरीत जिसके प्रति लगाव नहीं है … more →

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चाणक्य नीति:अपनी योजना गुप्त रखने पर ही सफलता संभव

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. यदि आप सफलता हासिल करना चाहते हैं तो गोपनीयता रखना सीख लें. जब किसी कार्य की सिद्धि के लिए कोई यो … more →

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चाणक्य नीति:मन शुद्ध हो तो प्रतिमा में भी भगवान्

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती … more →

Tags: arthshastra, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, आलेख, ज्ञान, संस्कार, समाज, साहित्य

चाणक्य नीति:मन में पाप हो तो तीर्थ से भी शुद्धि नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.आंखों से देखभाल का पैर रखें, पानी कपडे से छान कर पीयें. शास्त्रानुसार वाक्य बोलें, मन में सोच कर क … more →

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चाणक्य नीति:संतान को शिक्षा न देने वाले माता-पिता शत्रु के समान

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस … more →

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चाणक्य नीति:जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता वहाँ समृद्धि आती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.जिस देश में मूर्खों का सम्मान नहीं होता, अन्न संचित रहता है तथा पति-पत्नी में झगडा नहीं होता वहाँ … more →

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चाणक्य नीति:परिवार का सुख उसके स्वरूप पर निर्भर

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सुखद गृहस्थी और परिवार की सुख समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है की परिवार का स्वरूप कैसा है. जहाँ प … more →

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चाणक्य नीति: इस कड़वे संसार में दो मीठे फल भी लगते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार की तुलना एक कड़वे वृक्ष से की जाती है जिस पर पर अमृत के समान दो फल भी लगेते हैं-मधुर वचन … more →

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चाणक्य नीति:धर्म का नियम ही शाश्वत

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.शास्त्रों की संख्या अनन्त, ज्योतिष,आयुर्वेद तथा धनुर्वेद की विद्याओं की भी गणना भी नहीं की जा सकती … more →

Tags: arthshastra, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, अर्थशास्त्र, ज्ञान, साहित्य, हिन्दी, Blogging

चाणक्य नीति:आलस्य मनुष्य का स्वाभाविक दुर्गुण

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →

Tags: arthshastra, अभिव्यक्ति, कबीर वाणी, व्यंग्य, संस्कार, साहित्य, Blogging, Blogroll, Chanakya

चाणक्य नीति:जहाँ धनी, ज्ञानी और निपुण राजा न हो वह स्थान छोड़ दें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.किसी भी व्यक्ति का जहाँ सम्मान न हो उसे त्याग देना चाहिए. क्योंकि बिना सम्मान के मनुष्य जीवन जीने … more →

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चाणक्य नीति:जहाँ यज्ञ-हवन न हो वह घर मुर्दाघर समान 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस … more →

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चाणक्य नीति:हिंसक पशु,नदी और राजपरिवार सदैव विश्वसनीय नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.केवल मनुष्य योनि में जन्म लेने से सब मनुष्य एक समान नहीं हो जाते. एक ही माँ के गर्भ से उत्पन्न एक … more →

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