गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा है कहो ना हमसे आज क्या इरादा है…! लटों की’ यह शरारत किसके लिए है दिन-रात इतनी चाहत किसक… more →
तख़लीक़-ए-नज़रpalakmathur wrote 5 months ago: कुछ अरमान इस दिल के, तनहा जीवन से तन्हाई मिटाने के ख़्वाब, कुछ चाहत उसे पाने की, थोड़ी आरज़ू उसमे खो … more →
विनय wrote 11 months ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं तुम्हें चाहता हूँ यह इक़रार कर पाना बहुत मुश्किल है आकर तुम्हीं मुझसे इज़हारे-इश्क़ का कोई वादा ले … more →
sushilgirdher wrote 1 year ago: हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं। यूं तो हमें हंसने का भी … more →
mastani wrote 1 year ago: हसीना की चाहत हसीना की चाहत इस हसीना की क्या इच्छा है ? शायद आप समझ रहे होंगे, तो फिर देर किस बात की … more →
विनय wrote 1 year ago: जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है म … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी वैसे होता है, कभी ऐसे होता है यह प्यार जो होता है, प्यार ही रहता है… तुमको सब पता है हमक … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →
विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाये कभी तो पास बुला लो तेरी नज़दीकियों का मुझे एहसास हो जाये गुला … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं मस्ती दिल प … more →
विनय wrote 1 year ago: अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्दर का गुलाबी किनारा हो तन्हाई में हम हों रुसवाई में तुम हो तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →
विनय wrote 1 year ago: इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम बीच में यह फ़ासले इश्क़ की डोर से हमने जो बाँधे बन्धन क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी … more →
विनय wrote 1 year ago: दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल … more →