सरकार प्रसन्न , घोड़ा सन्न , कि घोड़े से तेज दौड़ता है - कागज का घोड़ा . - राजेन्द्र राजन कवि मित्र राजेन्द्र राजन की यह छोटी-सी कविता उनकी ‘घोड़ा’ – सिरीज़ से ली गई है । कई अन्तर्राष्ट्रीय मीड… more →
चिट्ठाकारीअफ़लातून wrote 1 year ago: सरकार प्रसन्न , घोड़ा सन्न , कि घोड़े से तेज दौड़ता है - कागज का घोड़ा . - राजेन्द्र राजन कवि मित् … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ चिट्ठाकारी पर पिछली पोस्ट से कुछ अनुदित सामग्री सम्पादित कर यहाँ प्रस्तुत की जा रही है। हिन्दी चिट … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: [ ‘बम और पिस्तौल इन्कलाब नहीं लाते' - शहीदे आजम भगत सिंह का यह बयान जैसे कइयों के गले नहीं उतरता … more →
सृजन शिल्पी wrote 1 year ago: पिछले दिनों पत्रकारिता बनाम चिट्ठाकारिता पर अच्छी बहस हुई। यहां तक कि देबाशीष जी द्वारा चिट्ठा चर्चा … more →
kakesh wrote 1 year ago: हिन्दी चिट्ठाकारी शुरु करने के बाद यह मेरी पहली दीवाली है. मेरा पहला चिट्ठा यहीं वर्डप्रेस पर था. हा … more →
kakesh wrote 2 years ago: रविवार 8 जुलाई को अंग्रेजी के प्रमुख समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख छ्पा था ” … more →
अतुल शर्मा wrote 2 years ago: कल इस चिट्ठे को एक वर्ष पूरा हो गया। समय की कमी के कारण इस पोस्ट कल नहीं लिख सका इसलिए चिट्ठे के ज … more →
Shrish wrote 2 years ago: ब्लॉगिंग ने वेब को दोतरफा संवाद माध्यम में बदल दिया है। सभी ब्लॉगर चाहते हैं कि ब्लॉग लिखना सरलतम तथ … more →
Shrish wrote 2 years ago: This post is a STUB you can help expanding it by comments. अपडेट: इस विषय पर परिचर्चा में एक पोल रखा … more →
Shrish wrote 2 years ago: जब मैंने हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रवेश किया था तो मुझे कई हिन्दी शब्दों का अर्थ समझ नहीं आया था, पहला … more →
Shrish wrote 2 years ago: कुछ समय पूर्व प्रभात टंडन जी ने पूछा था कि मैंने अपने चिट्ठे पर रंगीन शब्दों में कैसे लिखा है, इस वि … more →