ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं पैग़ामे-मोहब्बत चिठ्ठियाँ लाती नहीं तुम क… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं पैग़ … more →
विनय wrote 8 months ago: मेरी बाइसे-ज़ीस्त, तुमको इक नज़र देखने क … more →
विनय wrote 8 months ago: मेरे दिलसिताँ, तुम्हें देखकर मुझे पहल … more →