फोटो खींचना मुझे बहुत अच्छा लगता है। फोटोग्राफ़ी की विधिवत शिक्षा के नाम पर किसी से कोई पाठ नहीं पढ़ा लेकिन बचपन से जब से कैमरा पास आया यह काम मुझे खुशी देता है। प्रकृति के दृश्य मुझे बहका देते हैं। बस … more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: फोटो खींचना मुझे बहुत अच्छा लगता है। फोटोग्राफ़ी की विधिवत शिक्षा के नाम पर किसी से कोई पाठ नहीं पढ़ा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: जोशीमठ पर जैसे ही जाने का मार्ग खुला गाड़ियाँ इत्यादि वाहन जल्दी में गति पकड़ने लगे मानों रुकने के कार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: टिहरी झील देखने के लोभ में देर शाम को ही चल पड़े। पर कैमरे की बैटरी चार्ज्ड न होने के कारण झील के फोट … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: बद्रीनाथ से कुछ दूरी पर माणा गाँव है। इस पर पहले भी कुछ लिखा था। आज कुछ तस्वीरें और हैं| माणा गाँव स … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: हमारे फ्लैट की बेल्कनी में तेज़ धूप रहने के कारण शाम पाँच बजे तक वहाँ का दरवाज़ा खोलते ही नहीं है। कल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 7 months ago: रात यह पोस्ट प्रकाशित की पर फोटो समेत ग़ायब हो गयी। हम इसे पुनः डाल दे रहे हैं। गर्मी कई प्रकार की हो … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: घेर लेंगे आसमां को, बता देंगे सारे जहाँ को, हमसे जीवन सभी का, अस्तित्त्व ही सृष्टि का! … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करत … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: मुझे पता है यह बात कि पीठ दिखाना तो कायरता है। मैं कौन सी पीठ दिखा रही हूँ, मैं तो सोने की कोशिश कर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: हे प्रभु ! डर और आतंक मिटे, बस प्यार का रंग रहे! ईर्ष्या और द्वेष मिटे, बस मानवता की बयार बहे! … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: बचपन से सजी सड़क हैं, वाह !!! बचपन, हाय! बचपन। घूंघट हैं, घूंघट में लगे मलूक नार जन मन में कै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: प्रकृति के अदभुत दृश्य मन में एक अलग सी अनुभुति कराते हैं कि बस मन बाबला हो जाता है। क्या दूर और … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: कोई दर्द बढ़ानी, कोई दर्द दिलानी… #gallery-1 { margin: auto; } #gallery-1 .gallery-item { flo … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: लहराती, बलखाती, निर्मला, धवला च चंचला यमुना पैदल जाओ.. . डोली में जाओ पालकी पर जाओ या… … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: दुनिया में नये हैं, ठीक से चलना भी नहीं आता है। किसी से वास्ता नहीं पड़ा है।स्कूल की इमारत इनकी … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: कलियुग में नाम संकीर्तन से प्रभु की प्राप्ति में लीन होने की प्रेरणा देने वाला दिल्ली का इस्कॉन मंदि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: १. एक दिन एक गाँव में जाने पर- . ये चित्र बताते हैं वह सबकुछ है। २. भोले-भाले बच्चों का मनोरं … more →