जोशीमठ पर जैसे ही जाने का मार्ग खुला गाड़ियाँ इत्यादि वाहन जल्दी में गति पकड़ने लगे मानों रुकने के कारण लगे समय को पूरा करना चाहते हों। इतनी तेजी की कोई ज़रुरत नहीं। घुमावदार संकरे रास्ते पर आपा-धापी बिल… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: जोशीमठ पर जैसे ही जाने का मार्ग खुला गाड़ियाँ इत्यादि वाहन जल्दी में गति पकड़ने लगे मानों रुकने के कार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: टिहरी झील देखने के लोभ में देर शाम को ही चल पड़े। पर कैमरे की बैटरी चार्ज्ड न होने के कारण झील के फ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: बद्रीनाथ से कुछ दूरी पर माणा गाँव है। इस पर पहले भी कुछ लिखा था। आज कुछ तस्वीरें और हैं| माणा गाँव … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: हमारे फ्लैट की बेल्कनी में तेज़ धूप रहने के कारण शाम पाँच बजे तक वहाँ का दरवाज़ा खोलते ही नहीं है। कल … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: रात यह पोस्ट प्रकाशित की पर फोटो समेत ग़ायब हो गयी। हम इसे पुनः डाल दे रहे हैं। गर्मी कई प्रकार की ह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: घेर लेंगे आसमां को, बता देंगे सारे जहाँ को, हमसे जीवन सभी का, अस्तित्त्व ही सृष्टि का! … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: हम कितने भी दोस्ती का भाव रखते हों पर वे हमसे हमेशा डरती ही हैं। अपने-आप को इतना छिपाने की कोशिश करत … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: मुझे पता है यह बात कि पीठ दिखाना तो कायरता है। मैं कौन सी पीठ दिखा रही हूँ, मैं तो सोने की कोशिश कर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थ … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: हे प्रभु ! डर और आतंक मिटे, बस प्यार का रंग रहे! ईर्ष्या और द्वेष मिटे, बस मानवता की बयार बहे! … more →
प्रेमलता पांडे wrote 7 months ago: बचपन से सजी सड़क हैं, वाह !!! बचपन, हाय! बचपन। घूंघट हैं, घूंघट में लगे मलूक नार जन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: प्रकृति के अदभुत दृश्य मन में एक अलग सी अनुभुति कराते हैं कि बस मन बाबला हो जाता है। क्या दूर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 11 months ago: कोई दर्द बढ़ानी, कोई दर्द दिलानी… #gallery-1 { margin: auto; } #gallery-1 .g … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: लहराती, बलखाती, निर्मला, धवला च चंचला यमुना पैदल जाओ.. . डोली में जाओ पालकी पर जाओ या… … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: दुनिया में नये हैं, ठीक से चलना भी नहीं आता है। किसी से वास्ता नहीं पड़ा है।स्कूल की इमारत इनक … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: कलियुग में नाम संकीर्तन से प्रभु की प्राप्ति में लीन होने की प्रेरणा देने वाला दिल्ली का इस्कॉन मंदि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: १. एक दिन एक गाँव में जाने पर- . ये चित्र बताते हैं वह सबकुछ है। २. भोले-भाले बच्चों का मन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: इनको किसी की मदद नहीं चाहिए। कोई ख्याल रखे न रखे। ये तो जहाँ भी चाहे चढ़ जाती है- … more →