तुम्हारे नाम, न जाने कितने शब्द कटें, मरें। हर इच्छा का अंतिम संस्कार कर आया हूँ, हर खुशी को अग्नि दे आया हूँ। तुम्हारे जाने का समय आ गया है। … more →
ठेले पे हिमालयGaizabonts wrote 2 years ago: तुम्हारे नाम, न जाने कितने शब्द कटें, मरें। हर इच्छा का अंतिम संस्कार कर आया हूँ, हर खुशी को अग्नि … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: सपने देखो, पर उनके सच होने की शर्त मत रखो। … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: पिछले सप्ताह हम लंडन आर्ट फ़ेर गये थे । अनेक कलाकार वहाँ अपने काम का प्रदर्शन कर रहे थे । वैसे तो शाय … more →
Shrish wrote 2 years ago: यद्यपि हो सकता है गंणितीय रुप से यह मुर्खतापूर्ण लगे लेकिन Equation ‘expand‘ करने का यह … more →
Shrish wrote 2 years ago: इस चितचोर की लाखों लोगों को तलाश है, क्या आपमें से किसी ने इसे देखा है ? यदि हाँ तो कृपया बताइए ? … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: गुहागर चौपाटी, कोंकण … more →