महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अपनी आंखें थकाते हो। कोई दूसरा जलाकर चिराग तुम्हारी जिंदगी का दूर कर देगा अंधेरा यह सोचते हुए क्यों ना… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 8 months ago: महलों में रहने वाले भी ज्यादा पेट नहीं भर पाते-हिन्दी शायरी आकाश से टपकेगी उम्मीद ताकते हुए क्यों अप … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: चिराग दिल के जलाओ के ईद का दिन है, तराने झूम के गाओ के ईद का दिन है, ग़मों को दिल से भुलाओ के ईद का द … more →