चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है तारा तोड़ कर जमीन पर सजाया जाता है बेचने वाला सौदागर होना चाहिए ख्वाब और भ्रम बेचना यहां आसान है अपढ़ … more →
** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrikakmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है ता … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क्या तुम जी सकोगी, बोलो…! सीने जो एक दिल है इसमें तेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →
विनय wrote 1 year ago: पहली बार देखा तुमको जाने क्या हुआ दिल की धड़कनों का हल्का-हल्का एहसास हुआ डूब गया मैं तेरी आँखों में … more →