नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली गिराके राधा चली कहाँ ऐसे गगरी सँभाले इठलाती है बल खाती है जिया जलाती है राधा काहे साँवले से इतना इतरा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रप्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: कल से मौसम पंगे ले रहा है। कभी तेज हवा और बारिश तो कभी तेज धूप और उमस! नेहा परीक्षा देने आयी तो छतर … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →