वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक ख़ाब माना हमने जिसको वह छाला बनकर फूटा भी जिस कशिश पे हम मर बैठे उस कशिश ने दिल लूटा भी शायिर: विनय … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 3 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →