मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ रहे हैं और कुछ काँटे नये फ़ासिले कर के मुकम्मिल ला रहीं हैं दूरियाँ मै मिटा हर पल पलों से दूर जो उनके … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मंज़िलें दिखती नहीं बस छा रहीं हैं दूरियाँ रास्ते मुश्किल किये पास आ रहीं हैं दूरियाँ हर क़दम पर बिछ र … more →