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Blogs about: छीतस्वामी जी

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गोवर्धन की सिखर चारु पर

pushtimarg wrote 1 year ago: गोवर्धन की सिखर चारु पर फूली नव मधुरी जाय। मुकुलित फलदल सघन मंजरी सुमन सुसोभित बहुत भाय॥१॥ कुसुमित क … more →

Tags: राग बसंत, बसंत के पद

लाल ललित ललितादिक संग लिये

pushtimarg wrote 1 year ago: (उत्सव भोग आये तब) लाल ललित ललितादिक संग लिये बिहरत वर वसन्त ऋतु कला सुजान। फूलन की कर गेंदुक लिये प … more →

Tags: राग बसंत, बसंत के पद

बादर झूम झूम बरसन लागे ।

pushtimarg wrote 2 years ago: बादर झूम झूम बरसन लागे । दामिनि दमकत चोंक चमक श्याम घन की गरज सुन जागे ॥१॥ गोपी जन द्वारे ठाडी नारी … more →

Tags: जगाने के पद, नित्य सेवा, राग मल्हार

हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी1 comment

pushtimarg wrote 2 years ago: हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी । भव सागर ते काढे कृपानिधी राखे शरन अपनी ॥१॥ रसना रटत रहत निशिवासर शेष सहस … more →

Tags: राग बिहाग, आश्रय महात्म्य दीनत

१२. गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये

pushtimarg wrote 3 years ago: गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये । तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥ परम … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग मालकौस

११. धन्य श्री यमुने निधि देनहारी

pushtimarg wrote 3 years ago: धन्य श्री यमुने निधि देनहारी । करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि, जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥१॥ जिन कोउ … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग मालकौस

१०. जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे

pushtimarg wrote 3 years ago: जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे । तापर कृपा करत श्री वल्लभ प्रभु, सोई श्री यमुना जी को भेद पावे ॥१॥ … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग मालकौस

९. धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे

pushtimarg wrote 3 years ago: धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे । ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये, जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥ निश दिना क … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग मालकौस

pushtimarg wrote 3 years ago: भोग श्रृंगार यशोदा मैया,श्री विट्ठलनाथ के हाथ को भावें । नीके न्हवाय श्रृंगार करत हैं, आछी रुचि सों … more →

Tags: श्रृंगार के पद, राग बिलावल


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