गोवर्धन की सिखर चारु पर फूली नव मधुरी जाय। मुकुलित फलदल सघन मंजरी सुमन सुसोभित बहुत भाय॥१॥ कुसुमित कुंज पुंज द्रुम बेली निर्झर झरत अनेक ठांय। छीतस्वामी ब्रजयुवतीयूथ में विहरत हैं गोकुल के राय॥२॥… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: गोवर्धन की सिखर चारु पर फूली नव मधुरी जाय। मुकुलित फलदल सघन मंजरी सुमन सुसोभित बहुत भाय॥१॥ कुसुमित क … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: (उत्सव भोग आये तब) लाल ललित ललितादिक संग लिये बिहरत वर वसन्त ऋतु कला सुजान। फूलन की कर गेंदुक लिये प … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: बादर झूम झूम बरसन लागे । दामिनि दमकत चोंक चमक श्याम घन की गरज सुन जागे ॥१॥ गोपी जन द्वारे ठाडी नारी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी । भव सागर ते काढे कृपानिधी राखे शरन अपनी ॥१॥ रसना रटत रहत निशिवासर शेष सहस … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये । तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥ परम … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: धन्य श्री यमुने निधि देनहारी । करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि, जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥१॥ जिन कोउ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे । तापर कृपा करत श्री वल्लभ प्रभु, सोई श्री यमुना जी को भेद पावे ॥१॥ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे । ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये, जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥ निश दिना क … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: भोग श्रृंगार यशोदा मैया,श्री विट्ठलनाथ के हाथ को भावें । नीके न्हवाय श्रृंगार करत हैं, आछी रुचि सों … more →