मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है आज़माना है तो आज़मा ले हम भी तेरे बेताबी हैं जलाकर सब राख कर दें हम वह आतिशबाजी हैं एक दिन तुम्हें अपना बना ले… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है आज़माना ह … more →