चिल्ला चिल्ला कर वह करते हैं एक साथ होने का दावा यह केवल है छलावा मन में हैं ढेर सारे सवाल जिनका जवाब ढूंढने से वह कतराते आपस में ही एक दूसरे के लिये तमाम शक जो न हो सामने उसी पर ही शुबहा जताते महफिलो… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***shreesh k. pathak wrote 3 weeks ago: “…..आज इक बार फिर तेरा ना होना नागवार गुजरा है. वीरानी शाम में आशिक हवाओं ने मुझे … more →
रविकुल wrote 4 months ago: शहीदों के जिस्म पर लगेंगे कब तलक जख्म गहरे, कब तक बैठे रहेंगे निर्वाक लगाए सोच पर पेहरे, निर्दोश लहू … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला चिल्ला कर वह करते हैं एक साथ होने का दावा यह केवल है छलावा मन में हैं ढेर सारे सवाल जिनका जवा … more →