दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: ख्यालों के बंधन में फंसकर उनके इशारों पर नाचते रहे जिंदगी मेंं इसलिये हर कदम पर हारते रहे जो आजाद हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बरसों से कभी ऐसे मेघ नहीं बरसे हमेशा रहा जल का अकाल हम पानी की बूंद बूंद को तरसे बहुत सारी शायरी प्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: खबरों की खबर वह रखते हैं अपनी खबर हमेशा ढंकते हैं दुनियां भर के दर्द को अपनी खबर बनाने वाले अपने वास … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने जीवन में मैं अनेक बार पिकनिक गया हूं पर कहीं से भी प्रसन्न मन के साथ नहीं लौटा। वजह यह कि बरसा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने संगठन का चिंतन शिविर उन्होंने किसी मैदान की बजाय अब एक होटल में लगाया जहां सभी ने मिलकर अपना स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसे मित्र कहें किसे शत्रू आदमी बंटा हुआ है अपने अंदर सिमट जाता है अपने ख्यालों में एक तालाब की तरह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यूं तो चमकता चाँद देखकर अपना दिल बहला लेते पर जब आकाश में नहीं दिखता वह छोटा चिराग जला लेते हैं जिन् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू तुम्हारे हिट होने का एक नुस्खा लाया हूं सफलता बतलाने वाले डाक्टर से स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भीड़ में हमेशा खोते रहे अपने से न मिलने के गम में रोते रहे नहीं ढूंढा अपने को अंदर आदमी होकर भी रहा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वर्षा ऋतु का की पहली फुहार प्रेमी को मिली मोबाइल पर प्रेमिका की पुकार ‘चले आओ, घर पर अकेली हूं चंद ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द से भला कहां हमारे आंखों में आसू आते हैं दूसरों के दर्द से ही जलता है मन उसी में सब सूख जात … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सूरज की गर्मी में झुलसते हुए पानी में नहा गया था बदन जलती हवाओं में गर्म मोम की तरह पिघल रहा था मन च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आदमी से ही डरा आदमी अपने लिये एक झुंड बना लेता है जिसे समाज कहते हैं अकेले होने की सोच से घबड़ाया आद … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुछ नहीं कह सकते तो कविता ही कह दो कुछ नहीं लिख सकते तो कविता ही लिख दो कुछ पढ़ नहीं सकते तो कविता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धूप में पसीने से नहाते हुए जब देखता हूं अपना साया दिल भर आता है वह जमीन पर गिरा होता है मैं ढोकर चल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, गर्मी में हो रही बरसात जहां रुलाता पसीना, वहां करती बहार अपनी बात ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रसिद्ध होने के लिए चले जाते है उस राह पर जहां बुरे नाम वाले हो जाते हैं अगर नाम चमका आकाश में तो ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: विचारों की धारा मस्तिष्क में बहती चली जाती है जब तक बहती है अच्छा लगता है जब एक विचार अटक जाता है रु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘क्या दीपक बापू किक्रेट भूल गये देखना पता नहीं तुम्हें अब यहां क्रिकेट मैच चल रह … more →