आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ में वह ही ख़ुदा है सबका दर्द के पहलू में यार को सजदा किया जाता है आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →
विनय wrote 11 months ago: मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बह … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए एक बार तो कुछ कह दे सनम तू एक बार … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →