मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) उसने मुझसे ख़ुदा के नूर के बारे में पूछा मैंनें उसे आईना दिखा दिया उसने ख़ुदा की पनाहगाह का पता मांगा मैं फुटपाथ पर उकडू पडे ख़ुदाओं के बीच… more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) उसने मुझसे ख़ुदा के नूर के बारे में पू … more →
विनय wrote 1 year ago: हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है हर लम्हा ज़िन्दगी … more →
विनय wrote 1 year ago: आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: जब तक तेरी तमन्ना करेंगे जीते जायेंगे वरगना दम तोड़ देंगे मर जायेंगे तुमने जो कहा तो मर भी जाना है ह … more →
विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →