ख्वाब के बिखरे तिनके जख्म जब दे रहे थे , तुम ही थे एक बस , जो साथ मेरा दे रहे थे । दुर तक जब देर तक , आँखों में मृगतृण्णा रही , तुम ही थे पास जो हम से हकीकत कह रहे थे । दौर ही कुछ जमाने का यूँ ही था च… more →
लम्हें जिन्दगी केअफ़लातून wrote 4 weeks ago: जनम दिन १. जीर्ण कपड़ा उतार कर नया पहनना पुनर्जीवन है - मेरे गले यह बात अब तक नहीं उतरी | कुशन पर धु … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: “भगत सिंह का जन्म कृषकों के एक सिख परिवार में बंगा (लायलपुर-अब पाकिस्तान) में 27 सितंबर 1907 क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: ख्वाब के बिखरे तिनके जख्म जब दे रहे थे , तुम ही थे एक बस , जो साथ मेरा दे रहे थे । दुर तक जब देर तक … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: ख्वाब के बिखरे तिनके जख्म जब दे रहे थे , तुम ही थे एक बस , जो साथ मेरा दे रहे थे । दुर तक जब देर तक … more →