तुलसीदास को पढ़ने के बाद मुझे यही लगा कि एक निहायत ही पारदर्शी व्यक्तित्त्व के साथ समर्थकों और विरोधियों दोनों ने ही बहुत अन्याय किया है. समर्थक अन्याय : (1) तुलसीदास अवतारी पुरुष थे. (2) उनकी रामचरित… more →
एक आलसी का चिठ्ठाअफ़लातून wrote 2 weeks ago: मैंने जब हिन्दी में ब्लॉगिंग शुरु की उस समय से इस समय की कुछ दशा ही और है ! वैचारिक मतभेद तब भी थे ल … more →
Girijesh Rao wrote 2 months ago: तुलसीदास को पढ़ने के बाद मुझे यही लगा कि एक निहायत ही पारदर्शी व्यक्तित्त्व के साथ समर्थकों और विरोध … more →