हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्ज्वाला स्वतंत्रता पुकारती ‘अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ- प्रतिज्ञ सोच लो, प्रशस्त पुण्य पथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!’ असंख्य कीर्ति-… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!Rewa Smriti wrote 1 year ago: हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्ज्वाला स्वतंत्रता पुकारती ‘अमर्त्य … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा॥ सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: आह ! वेदना मिली विदाई मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई छलछल थे संध्या के श्रमकण आँसू- … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: वे कुछ दिन कितने सुंदर थे ? जब सावन घन सघन बरसते इन आँखों की छाया भर थे सुरधनु रंजित नवजलधर से- भरे … more →