साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा साहिबा, साहिबा, साहिबा तू मेरे प्यार की सुबह तुझको ढूँढ़ती मेरी निगाह क़ातिलाना तेरी हर अदा मार न डाले कहीं दिलरुबा साहिबा, साहिबा, साहिबा साहिबा, साहिबा, … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा साहिबा, साहिबा, साहिबा तू मेरे प्यार की सुबह तुझको ढूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →