गोमती किनारे बादर कारे कारेबरस रहे भीग रहे तन और सड़क कनघहर गगन घन धो रहे धूल धनमहक रही माटी. बही चउआईसहेज रही गोरी केश कारे बहक लहक कपड़े कजरारे नयन धुनगुन चुन छुन छहरफहर बिखर शहर सररचहक उठे पनाले. ब… more →
वर्ड प्रेस पर आलसीNidhi KM wrote 6 days ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: साली और भाभी पर जो कोई ख्याली शेर लिखा पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा। जो बयान किये दर्द जमाने के उस … more →