वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ नही मिलता जाने वो वक्त कब आएगा उस वक्त के इंतज़ार में तो उमर गुजर गई वक्त इंसान को क्या से क्या बना द… more →
कुछ िदल सेरवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: किधर गये वो वायदे? सुखों के ख़्वाब क्या हुए? – शलभ श्रीराम सिंह ( a kavita poster by ravi kumar … more →
kmuskan wrote 11 months ago: वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →
kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →
विनय wrote 2 years ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात करनी थी उसे कोशिश तो उसने मुझ तक पहुँचने की बहुत की थी और फिर व … more →