विनय wrote 1 year ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक साया था सर पे हुमा का मेरी शिकस्त ही तक़दीर हुई मेरी जब जाना … more →
विनय wrote 1 year ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिसके साथ की तमन्ना थी मेरे दिल को वह तो केवल अब मेरे ख़ाबों में … more →