ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परेशान हर घड़ी वो शख़्स कोई फ़ैसला कर क्यों नहीं जाता क्यों मेरे ही पहलू में ये आता है लौटकर ये ग़म ज़रा पूछ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →