Blogs about: जानिब

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तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है7 comments

विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, ज़िबह, Love, प्यार, मोहब्बत, यार, बेवजह, नज़र

वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है16 comments

विनय wrote 4 months ago: वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है जाने सही करता है या ग़लत करता है वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं दिल फि … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, ग़लत, दिल, नफ़रत, प्यार, मग़्फ़रत, मग्फ़िरत, मोहब्बत

जो मुझको जानते हैं5 comments

विनय wrote 12 months ago: जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है म … more →

Tags: मेरी नज़्म, शिकन, फ़ितरत, Pain, चाहत, सूरज, desire, तड़प, habit

इस जानिब य उस जानिब

विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, रात, नज़र, dream, Night, ज़ख़्म, Silence, दिन

अश्को-अक्स चश्म में नहीं है

विनय wrote 1 year ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ जितना सुरूर उन आँखों में था उतना और कहाँ रोज़ शाम दरवाज़े पे बैठ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, eyes, haze, प्यार, दरवाज़ा, मोहब्बत, शाम

ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको3 comments

विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ुशी, दर्द, दिल, प्यार, ग़म, ख़ामोश, रुलाये, वुजूद

शामे-दीपावली

विनय wrote 1 year ago: एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नव … more →

Tags: मेरी नज़्म, Earth, चाँद, इश्क़, Love, दुल्हन, प्यार, मोहब्बत, ज़मीं


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