इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क्या कोई चाक जिगर महफ़िल में आया है रो रही है रात चांद से छुपकर देखो साज़-ए-दिल किस ख़ाकजां ने बजाया है म… more →
इक शायर अंजाना सा...योगेन्द्र wrote 9 months ago: जब देश के लब्धप्रतिष्ठ उद्योगपति रतन टाटा ने लखटकिया नैनो-कार बाजार में उतारने का संकल्प लिया और अपन … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: शाम खाली है जाम खाली है ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा मैने तन्हाई मगर बच … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंख … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल पर होने लगा इक अंजाना असर खोने लगी है हर शाम मेरी नज़र गौर से कभी उसको देखा नहीं फिर भी पहचान लूँ … more →