ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी ऱूह टुकड़ों में जो बँट जायेगी आज फ़िर तन्हाई साथ लायी उन्हे आज फ़िर नींद उचट जायेगी अब तुम आ ही गये खयालों में रात उदासी में ही कट जायेगी शाम आई चमक उठी यादें तन्हाई सीने से… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी ऱूह टुकड़ों में जो बँट जायेगी आज फ़िर तन्हाई साथ लायी उन्हे आज फ़िर नींद … more →