ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़रा खुल के शरमाओ मुझे क़रार आ जाये कुछ दूर बैठो तुम, करने दो तमन्ना ज़रा ख़लिश को बढ़ाओ मुझे क़रार आ जाये श… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़र … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ नहीं कोई इन्तेज़ार मिल जाये ज़िंदगी साहिलों पर अटकी हुई है अब … more →