कभी कभी चंद कदमो का फासला दुनिया बदल देता है चंद कदमो का फासला ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है चंद कदमो का फासला कभी ना मिटने वाला फासला बन जाता है चंद कदमो का फासला जिंदगी ओर मौत का फासला बन जाता है … more →
कुछ िदल सेwrote 8 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →
wrote 11 months ago: कभी कभी चंद कदमो का फासला दुनिया बदल देता है चंद कदमो का फासला ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है चंद क … more →
wrote 11 months ago: निकले थे अंधेरे में माटी के चिराग ढूंढने पर कांच के बल्ब के टुकड़े लग गये पांव में रौशनी ने भी अपने … more →
wrote 12 months ago: नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांता … more →
wrote 1 year ago: दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दा … more →
wrote 1 year ago: वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ … more →
wrote 1 year ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
wrote 1 year ago: खवाबो में चाँद को देखा था उसे पाया भी था पर हकीकत में कभी उसे पाने की तमन्ना नही की मैं खवाब और हकीक … more →
wrote 1 year ago: क्यों ? जिंदगी बार- बार उसी मोड़ पे ले आती है जहाँ से हम चले थे क्यों ? जिंदगी बार- बार उन्ही सवालों … more →
wrote 1 year ago: जिंदगी दोस्तों के नाम कर दी, उनकी खातिर जान कुर्बान कर दी, मरने का हमे कोई गम नही, खुशी है दोस्तों क … more →
wrote 1 year ago: क्या भरोसा जीवन का, एक बुलबुला है, न जाने कब टूट जाये कब तक सलामत है। यह पंक्तियां कभी किसी साधु महर … more →