दुनिया के सितम याद ना अपनी हि वफ़ा याद अब मुझ को नहीं कुछ भी मुहब्बत के सिवा याद मैं शिक्वाबलब था मुझे ये भी न रहा याद शायद के मेरे भूलनेवाले ने किया याद जब कोई हसीं होता है सर्गर्म-ए-नवाज़िश उस वक़्त… more →
चौपालSatish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: दुनिया के सितम याद ना अपनी हि वफ़ा याद अब मुझ को नहीं कुछ भी मुहब्बत के सिवा याद मैं शिक्वाबलब था मु … more →