PRIYANKAR wrote 1 year ago: जितेन्द्र श्रीवास्तव की एक कविता धूप धूप किताबों के ऊपर है या भीतर कहीं उसमें कहना मुश्किल है इस … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: लुंगी घूमना हो तो लपेट लीजिए और दोपहरी नींद आ जाए किसी तरु तले तो तान लीजिए देह पर लुंगी वसन भी … more →