हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इस दिल को क्योंकर हो गया कुछ भी कर लूं मै मगर मै जीत के काबिल नहीं मै खड़ा हूँ आज देखो इश्क़ की दहलीज़ प… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →