यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जायेंगे ये वो दिये हैं, लम्हों में बुझ जायेंगे… My hopes are broken My soul is bruised but you… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →
kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेर … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →
विनय wrote 1 year ago: साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा साहिबा, साहिबा, साहिबा तू मेरे प्यार की सुबह तुझको ढूँ … more →
विनय wrote 2 years ago: आज फिर धुँधले बादलों के पार देखा चाँद, सुनहरा चाँद… आज फिर तेरी याद आयी, आज फिर मेरा जिस्म महक … more →
विनय wrote 2 years ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →