कोई सात साल पहले की बात है. मैं हमेशा डरा-डरा सा अनुभव करता था. मैं बचपन से ही बहुत संवेदनशील था इसलिए छोटी-छोटी घटनाएं भी मेरे मन में बहुत गहरे बैठ जाया करती थीं. उस समय तो मैं उसे बाहर व्यक्त नहीं ह… more →
अलखबाड़ाalakh niranjan wrote 9 months ago: कोई सात साल पहले की बात है. मैं हमेशा डरा-डरा सा अनुभव करता था. मैं बचपन से ही बहुत संवेदनशील था इसल … more →
alakh niranjan wrote 9 months ago: मुझे लगता है आपकी उम्र ऐसी है जिसे टीनएज कहते हैं. इस उम्र में ध्यान केन्द्रित नहीं होता और सबसे ज्य … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: धर्म के बारे में यह बहुत भ्रम है कि यह कोई निजी या आत्मिक उन्नति का साधन है. भारत में धर्म सामाजिक व … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: चेतना के तीन तल हैं. स्थूल, सूक्ष्म और शून्य. स्थूल जगत की चेतना क्या है यह किसी को भी बताने की जरूर … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: लोग अक्सर कहते हैं कि क्या करें बहुत तनाव रहता है. शहरी जीवन में तो तनाव जैसे अनिवार्य हिस्सा हो गया … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: बहुत सोचा कि इसका हिन्दी अनुवाद क्या करूं? लेकिन सटीकता से कोई शब्द समझ में आया नहीं. स्वार्थ बुद्धि … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: कृष्ण हर साल पैदा होते हैं. उसी समय. उसी तिथि और वार को. क्या यह केवल उत्सवधर्म है या फिर इसके पीछे … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: तनाव और रोगों से मुक्ति पानी हो तो शरीर को श्रमशील बनाईये. बुद्धि को विश्राम दिजीए. शरीर का श्रम ऐसा … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः वैर करना आसान है. वैर न करना बहुत मुश्किल है. हम वैर-भाव कब रखते हैं? जब हम … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: ऊँ शांति… एक बात पक्की है कि जो अपने मुताबिक जीवन जी रहा है वही सफल है. अपने मुताबिक जीवन? क्य … more →