कड़ी जोड़ने के लिए देखें : . प्रकृति और जीवन पद्धति जिस प्रकार लोग पृथ्वी पर फैलते गए उसी प्रकार पृथ्वी के साथ मानव के संबंधों की बहुत परिष्कृत व्यवस्था बनती गयी. विख्यात नवजाति विज्ञानी लेविन और चेबोक… more →
नया सर्वहारा पुनर्जागरण नया सर्वहारा प्रबोधनShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखें : . प्रकृति और जीवन पद्धति जिस प्रकार लोग पृथ्वी पर फैलते गए उसी प्रकार पृथ् … more →
premlatapandey wrote 1 month ago: पानी है, जीवन है, शांति है, आकर्षण है! … more →
the3rdone wrote 2 months ago: वाचा बांधने के लिए दो जन का ज़रुरी है. एक आदमी दुसरा आदमी के साथ वाचा बांधता है और एक दुसरे को कुछ श … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पिता ने अपनी पूरी जिंदगी छोटी दुकान पर गुजारी और वह नहीं चाहते थे कि उनका पुत्र भी इसी तरह अपनी जिंद … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: नन्ही, कोमल सी, पंख पसारे, उड़ती थी स्वछ्न्द गगन मे, हवाए ठंडी लगती थी, नील गगन दिखता था, ना कोई डर … more →
Nishant wrote 4 months ago: विद्यारम्भ से पहले एक शिष्य अपने गुरु से सभागार में वार्तालाप करने के लिए आया. वह हर बात के बारे में … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: यह किस्सा नहीं किताबों का यह खेल नहीं दस्तूरों का, एक मई इतिहास बना है दुनिया के मज़दूरों का। एक मई … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: कार्ल मार्क्स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लगाक … more →
ambuj wrote 7 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 9 months ago: आपस की बात मजदूर भाइयो, मैं अभी कुछ दिनों से ही फैक्ट्री में काम करने लगा हूँ, किंतु इतने में ही मैं … more →
SaritaArun wrote 10 months ago: जीवन में प्रगति के लिये सिर्फ दो चीजें जरूरी हैं: एक गलतियां करना और दूसरे उनसे सीख लेना. There are … more →
ambuj wrote 11 months ago: कभी पलकों पे आंसू आते हैं तो कभी लब थरथराते हैं, कभी दिल में बेचैनी होती है तो कभी साँसे थम सी जाती … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरा तहां न खोलिए,जहां खोटी है हाट कसि करि बांधो गठरी, उठि चालो बाट संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं … more →
shaifaly wrote 1 year ago: ज़िंदगी के घर में जब भी झाँककर देखते हैं, तो आँगन में सुख मिट्टी में खेलता नज़र आता है। ममता उसे डाँट … more →
अजीत कुमार मिश्रा wrote 1 year ago: क्या भरोसा जीवन का, एक बुलबुला है, न जाने कब टूट जाये कब तक सलामत है। यह पंक्तियां कभी किसी साधु महर … more →
विनय wrote 1 year ago: जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में दर्द भरना चाहता हूँ गीली आँखों में सच्चे अफ़साने ऐसे जीवन से डर … more →