Blogs about: जीवन

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जीवन का अर्थ4 comments

Nishant wrote 1 day ago: विद्यारम्भ से पहले एक शिष्य अपने गुरु से सभागार में वार्तालाप करने के लिए आया. वह हर बात के बारे में … more →

Tags: अन्य कथाएँ

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, संघर्ष, Marxism, कविता, उदारीकरण, वर्ग चेतना

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, मार्क्सवाद, विचारणीय, साम्राज्यवाद, Marxism

मई दिवस

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: यह किस्सा नहीं किताबों का यह खेल नहीं दस्तूरों का, एक मई इतिहास बना है दुनिया के मज़दूरों का। एक मई … more →

Tags: कविता, विरासत, संघर्ष, सर्वहारा, वर्ग चेतना, सर्वहारा का संगीत

कार्ल मार्क्‍स के जन्मदिन (5 मई) के अवसर पर 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: कार्ल मार्क्‍स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्‍स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लग … more →

Tags: एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, बिगुल, मार्क्सवाद, विरासत

चलल कर ये बबुनी ओढ़नी संभाल के

ambuj wrote 2 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →

Tags: गाँव, समाज, bhojpuri, धर्म, लईका, लड़की, dharm, Gaon, Jeevan

तनख्वाह का सच

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: आपस की बात मजदूर भाइयो, मैं अभी कुछ दिनों से ही फैक्ट्री में काम करने लगा हूँ, किंतु इतने में ही मैं … more →

Tags: विचारणीय, क्रांति, ललकार, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, मार्क्सवाद, संघर्ष

प्रगति के लिये सिर्फ दो चीजें जरूरी

SaritaArun wrote 5 months ago: जीवन में प्रगति के लिये सिर्फ दो चीजें जरूरी हैं: एक गलतियां करना और दूसरे उनसे सीख लेना. There are … more →

Tags: प्रगति

~~ कभी पलकों पे आंसू ~~1 comment

ambuj wrote 6 months ago:  कभी पलकों पे आंसू आते हैं तो कभी लब थरथराते हैं, कभी दिल में बेचैनी होती है तो कभी साँसे थम सी … more →

Tags: कविता, Kavita, Poem, उम्मीद, कभी आंसू, पलक, बेचैनी, हिन्दी कविता, Hindi Poem

जाने वो पल कहाँ खो गए8 comments

kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, पल, चाँद

संत कबीर संदेशः खोटी मनोवृत्ति के लोगों के सामने अपने रहस्य न खोलें

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हीरा तहां न खोलिए,जहां खोटी है हाट कसि करि बांधो गठरी, उठि चालो बाट संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं … more →

Tags: हिन्दी, abhivyakti, Internet, Kabir, Friends, dharm, dohe, hindu, bharat

कुएँ का मेंढक (जीवन के रंगमंच से...... )

shaifaly wrote 11 months ago: ज़िंदगी के घर में जब भी झाँककर देखते हैं, तो आँगन में सुख मिट्टी में खेलता नज़र आता है। ममता उसे डाँट … more →

Tags: जीवन के रंगमंच से, रंगमंच, जिजीविषा, शैफाली

भरोसा जीवन का

अजीत कुमार मिश्रा wrote 1 year ago: क्या भरोसा जीवन का, एक बुलबुला है, न जाने कब टूट जाये कब तक सलामत है। यह पंक्तियां कभी किसी साधु महर … more →

Tags: मल्टी लेवल मार्केटि, जिंदगी

जिगर को चाक करना चाहता हूँ

विनय wrote 1 year ago: जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में दर्द भरना चाहता हूँ गीली आँखों में सच्चे अफ़साने ऐसे जीवन से डर … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, दर्द, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, Pain

वह मौसम इक बार 2 comments

विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Heart, Love, possible, जुदा, मौसम, दिल, प्यार

जीवन की पहली धूम

विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →

Tags: मेरा गीत, रंग, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, फूल, बारिश, सुबह

तुम हो मेरी चंद्रकला

विनय wrote 1 year ago: अम्बर में जब चाँद खिला उस पल से चला जानाँ एक नया सिलसिला मुहब्बत भरी वादियों में इक नया गुल खिला तुम … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, मुहब्बत, इश्क़, Love, प्यार, माहताब, मोहब्बत, वफ़ा

जीवन पर थोड़ा रंदा फेरो रे.....!3 comments

विकास परिहार wrote 1 year ago: आज यूं ही घूमते-घूमते एक बढ़ई के घर के सामने से निकल रहा था। मैने देख कि वो एक खुर्दुरी लकड़ी पर लगाता … more →

जीवन ही मृत्यु है3 comments

विकास परिहार wrote 1 year ago: वर्तमान मानव अपने को कई तरह के तरह के भय से जकड़ा हुआ पाता है जैसे असफलता का भय, असुरक्षा का भय इत्या … more →


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