बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने… क्या वहाँ तक, वहाँ तक मेरी आवाज़, मेरी सदा जाती नहीं क्या वहाँ तुझे, वहाँ तुझे मेरी बातें, मेरी … more →
तख़लीक़-ए-नज़रAmarjeet Singh wrote 1 year ago: जुदाई की घड़ी आई, नजरो से नज़रे टकराई, आँखो से वो ओझल हुई, वो मेरी नजरो से ओझल हुई, रेगिस्तान मे वर् … more →
विनय wrote 1 year ago: बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम मेरी ज़िन्दगी मेरा क़रार हो गया मुझको तुमसे प्यार तू आ जाये अगर मेरे क़रीब तो खुल जायेगा मेरा नसीब … more →