मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ कभी दिल कहता है उसे भुला दूँ क्या करूँ दिल दो तरफ़ा हो गया है हर पल मुझसे ख़फ़ा हो गया है दिल सोच रहा है क्या… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ कभी दिल … more →