हर ज़ुबाँ से आता हुआ अल्फ़ाज़ जुदा है सब ही की रवायतों का अंदाज़ जुदा है मुफ़लिसी हर आँख में किसी ना किसी शय की अपनी तरह से हर कोई मोहताज जुदा है मूर्ती भी सजी है मय्यत भी ज़ुल्फ़ भी फूलों का रंग एक है परवाज़… more →
इक शायर अंजाना सा...Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम, आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात … more →
विनय wrote 1 year ago: निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हर ज़ुबाँ से आता हुआ अल्फ़ाज़ जुदा है सब ही की रवायतों का अंदाज़ जुदा है मुफ़लिसी हर आँख में किसी ना किसी … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास मेरे जो तेरी कोई तस्वीर होती तुम्हें प्यार बेइंतिहाँ प्यार करत … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →
विनय wrote 1 year ago: बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने … more →
विनय wrote 1 year ago: साहिबा, साहिबा, साहिबा तेरी अदाओं पर मैं फ़िदा साहिबा, साहिबा, साहिबा तू मेरे प्यार की सुबह तुझको ढूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: पलाश का फूल हूँ ज़िन्दगी है ख़ुशबू से जुदा कभी मैं जुदा कभी तुम जुदा और ज़िन्दगी क्या? शायिर: विनय प्र … more →
विनय wrote 1 year ago: रहूँ मैं कैसे जुदा मैं जुदा रह नहीं सकता सहूँ मैं कैसे दर्द मैं दर्द सह नहीं सकता इश्क़ ने ऐसा मारा अ … more →
विनय wrote 2 years ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →