जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की परियों के रंग दमकते हों ख़ुम शीशे जाम छलकते हों महबूब नशे में छकते हों जब फागुन रंग झमकते हों नाच रंगीली परियों का कुछ भीगी तानें होली की कुछ तबले खड़कें रं… more →
आवारा बंजारासंजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की परियों के रंग दमकते हों ख़ुम शीशे जाम छलकते हों महबूब न … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: रायपुर में जन्में, भोपाल से मैकेनिकल इंजीनीयरिंग करने वाले युवा कवि नीलेश वर्तमान में लंदन में है। … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: 2003 की गर्मियों में एक रविवार को जनसत्ता का रविवारी अंक पढ़ते हुए मेरी नज़र संतोष चौबे की इस कविता पर … more →