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Blogs about: ज्ञान

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चाणक्य नीति-संतोष से ही अमृत मिलता है

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: संतोषाऽमृत-तुप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। न च तद् धनलूब्धानामितश्चयेतश्च धावताम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, समाज, सूचना, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, अध्यात्म, धर्म

अंतरिम1 comment

mequitnever wrote 1 month ago: क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ … more →

Tags: ज़िन्दगी life, Life

बुढ़ापे में कुछ नहीं सीख सकते-हिन्दू अध्यात्मिक संदेश (In old age can not learn anything - Hindu spiritual message)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं याव … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, मस्त राम, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hindu darashan, hindu dharm, hindu thinking

चाणक्य नीति-अपने मुख में कटु शब्दों की खेती न करें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यदीच्छसि वशीकर्तंु जगदेकेन कर्मणा। परापवादसस्येभ्यो गां चरंन्तीं निवारथ।। हिंदी में भावार्थ-नीति विश … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यातम, आलेख, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज

चाणक्य नीति-मंदिरों में तोड़फोड़ करना वाले लोग गंदे (mandiron men todfod-chankya niti

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: परकार्यविहन्ता च दाम्भिकः स्वार्थसाधकः। छली द्वेषी मृदः क्रूरो विप्रो मार्जार उच्यते।। हिंदी में भाव … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, web duniya, hindi megzine, chankya

ज्ञान का मार्ग11 comments

Nishant wrote 3 months ago: एक शिष्य ने एक दिन सूफी संत फिरोज़ से पूछा: “किसी गुरु की एक झलक पाकर ही उसके इर्दगिर्द जिज्ञा … more →

Tags: सूफी कथाएँ

दूसरे की दौलत को धूल समझें-चाणक्य नीति (dusre ki daulat ko dhool samjhen-chankya niti2 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी मे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चाणक्य नीति, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, संस्कार, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging


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