झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके रुख पे नक़ाब आधा आधा नज़र में हैं पर वो हासिल नहीं हैं है आधी हक़ीक़त सराब आधा आधा चेहरे पे यूँ छाई ज़ुल्फ़… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: झाँके है ज़ुल्फ़ों से शबाब आधा आधा रात आधी आधी माहताब आधा आधा देखनेवालों संभल जाओ ज़रा तुम है आज उनके र … more →